रविवार, 16 नवंबर 2008

मंदी से निपटने की कार्ययोजना पर सहमति

वाशिंगटन। दुनिया के 20 शीर्ष अर्थव्यवस्था वाले देशों की वाशिंगटन में हुई बैठक में वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए कार्ययोजना बनाए जाने पर सहमति बनी है।अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश ने कहा कि बैठक में मंदी से निपटने के लिए आर्थिक विकास संबंधी नीतियों पर सहमति बनी। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के नियमन और निगरानी के लिए 31 मार्च तक सुझाव पेश करने की डेडलाइन तय की गई.उन वित्तीय कंपनियों की सूची जारी करने पर भी सहमति बनी जिनके डूबने से वैश्विक वित्त व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.बीसों सदस्य देश अगले साल अप्रैल में एक बार फिर बैठक करेंगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे.
बैठक की समाप्ति के बाद शनिवार को जारी बयान में कहा गया कि वित्ताीय संकट के चलते सभी देश पांच सामान्य सिद्धांतों के आधार पर उचित कदम उठाएंगे ताकि अर्थव्यवस्था की सुस्ती को खत्म किया जा सके। जी 20 के सभी देश 30 अप्रैल 2009 तक एक बार फिर बैठक करेगे और आगे की रणनीति पर चर्चा करेगे। बैठक में अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि बैठक में एक समय मे एक ही राष्ट्रपति हिस्सा ले सकता है।
हालाँकि साझा योजना पर सहमति नहीं बन पाई. सभी देश अपने घरेलू हालात के मुताबिक उचित क़दम उठाएंगे ताकि अर्थव्यवस्था की सुस्ती को ख़त्म किया जा सके.अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा कि वो बैठक से संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा, "अगले साल मैं तो राष्ट्रपति नहीं रहूंगा लेकिन ओबामा आपसे मुखातिब होंगे."
मनमोहन की दलील
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक मंदी के लिए विकासशील देश ज़िम्मेदार नहीं हैं बल्कि वे भुक्तभोगी हैं.ख़ुद अर्थव्यवस्था के जानकार भारतीय प्रधानमंत्री ने वाशिंगटन में आयोजित शिखर सम्मेलन में कहा, "मंदी से विकासशील देशों का निर्यात प्रभावित होगा और उन्हें कर्ज़ मिलने में भी दिक्कत होगी. विदेशी निवेश तो कम होगा ही. इन सबका असर विकास दर में कमी के रुप में सामने आएगा."मनमोहन सिंह ने कहा कि विकासशील देशों में विकास दर में कमी का मतलब होगा लाखों लोगों को ग़रीबी की ओर धकेल देना. उन्होंने चेतावनी भरे लहज़े में कहा कि मंदी का असर स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी पड़ सकता है.

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