रविवार, 16 नवंबर 2008

आईएमएफ लोन के लिए बेचैन पाकिस्तान

फरहान बुखारी
आर्थिक सुस्ती से बेहाल पाकिस्तान पैसे-पैसे के लिए मोहताज है और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से लोन हासिल करने के लिए बैंक ब्याज दर में 2 फीसदी इजाफा कर इसे 15 फीसदी तक पहुंचा दिया है। पाकिस्तान और आईएमएफ के अधिकारियों के बीच लोन की शर्तो को लेकर बातचीत चल ही रहा था कि इसी बीच पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक - स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान ने महंगाई में इजाफे पर सोचे बगैर ब्याज दर बढ़ाने का फैसला कर लिया।

तीस साल में सबसे ज्यादा खराब आर्थिक हालत से गुजर रहे पाकिस्तान अपने खजाने में मुद्रा भंडार बढ़ाने के लिए अगले एक-डेढ़ साल में टैक्स ढ़ांचे में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। राजनीतिक प्रतिक्रिया की परवाह किये बगैर पाकिस्तान की जरदारी सरकार प्रभावशाली जमीन मालिकों समेत हर तबके के धनी वर्ग की आय पर टैक्स बढ़ाने पर गंभीरता से सोच रही है। इस दिशा में वित्त मंत्री ने टैक्स का मसौदा बनाने के लिए अपने मंत्रालय के अफसरों को दिशा निर्देश दे दिया है।

पाकिस्तान में मुद्रास्फीति की दर अभी 25 फीसदी है जो 30 साल के इतिहास में अब तक का एक रिकार्ड है। स्टेट बैंक आफ पाकिस्तान के गवर्नर शमशाद अख्तर के लिए यह सबसे कठिन घड़ी है और इस बारे में उनका बयान भी आया है कि पिछले कुछ समय से जो कदम उठाये जा रहे हैं उसके पीछे मकसद यही है कि वित्तीय नीति को सख्त बनाया जाए जिससे कीमतों में स्थिरता बनी रहे। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को वित्तीय संकट के साथ ही कई तरह की घरेलू चुनौतियों से निपटना पड़ रहा है। लंबे समय से आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्तान में सत्ता बदलने के बाद जरदारी ने सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। जरदारी सरकार ने टैक्स वसूली सिस्टम में बदलाव के साथ ही बार- बार हो रहे इस्लामी आतंकवादी हमलों से बचाव के लिए सुरक्षा इंतजाम को बेहतर बनाने पर भी खासा जोर दिया है।

जुलाई में केंद्रीय बैंक ने बैंक ब्याज दर में 100 बेसिस प्वाइंट का इजाफा करने के बाद पिछले बुधवार को फिर 200 बेसिस प्वाइंट का इजाफा कर ब्याज की दर 15 फीसदी तक पहुंचा कर देश को हैरत में डाल दिया। ब्याज बढाने पर अख्तर ने तर्क रखा कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में जून महीने तक समाप्त हुई तिमाही में पाकिस्तान का चालू खाते का घाटा लगभग दुगुना पहुंच गया था और जुलाई-सितंबर की तिमाही में यह घाटा 5.9 बिलियन डालर तक पहुंच गया। पिछले वित्तीय वर्ष की इसी तिमाही में यह घाटा 3 बिलियन डालर था। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि ब्याज दर में वृद्धि से नियोक्ताओं को बड़े पैमाने पर नुकसान होगा, खासकर कपड़ा क्षेत्र में। भारी भरकम ब्याज से निजात पाने के लिए ज्यादातर उद्योग अपने खर्च घटाने के लिए मजबूर हो गए हैं। ये उद्योगपति विश्वव्यापी आर्थिक सुस्ती की वजह से पहले से ही परेशान थे। पाकिस्तान के मशहूर अर्थसास्त्री परवेज ताहिर का कहना है कि जब हम आईएमएफ की अगुवाई में प्रोग्राम के तहत चलेंगे तो इसका दूरगामी असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ना लाजिमी है जो पहले से ही धीमी विकास दर से परेशान है। उनका तर्क है कि धीमी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में सरकार को कई बड़ी चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा है।

उन्होंने सरकार को आईएमएफ के साथ समझौता वार्ता करने में देरी पर फिर आलोचना की। उनका यह भी कहना है कि चार से छह माह पहले जब पाकिस्तान की आर्थिक हालत थोड़ी बेहतर थी उसी वक्त आईएमएफ से संपर्क करना चाहिए था। अब इसमें देरी का मतलब है कि आईएमएफ अपनी शर्तो पर ही धन देगा। हालांकि इस बारे में पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इस्लामाबाद आईएमएफ की लगभग सभी शर्तो को पूरा कर दिया है इसलिए सरकार को लोन की मदद में आशंका नजर नहीं आ रही है। टैक्स में सुधार पर पाकिस्तानी सरकार की सफाई है कि यह देश के घरेलू आर्थिक कार्यक्रम के तहत हो रहा है न कि आईएमएफ के दबाव में लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि टैक्स वसूली की जर्जर व्यवस्था में सुधार से ही आईएमएफ के सामने पाकिस्तान का मामला मजबूत होगा। पाकिस्तान में विपक्ष वित्तीय संकट की गंभीरता को तो समझ रहा है मगर इस मसले पर सरकार के साथ खड़ी नहीं दिख रही है। ऐसे में जरदारी देश को वित्तीय संकट से उबार पाने में कितना सफल हो पाएंगे यह उनके राजनीतिक जीवन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।

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