बुधवार, 12 नवंबर 2008

जापान पर गहराया आर्थिक संकट

जापान पर वैश्विक आर्थिक संकट का असर गहराता जा रहा है। आर्थिक सुस्ती की वजह से सिर्फ अक्टूबर महीने में 1429 कंपनियां दिवालिया हुईं जो इस साल की सर्वाधिक संख्या है। एक सर्वे के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस साल 13।4 प्रतिशत अधिक कॉरपोरेट कंपनियां दिवालिया हुई हैं क्योंकि वैश्विक ऋण संकट के बीच कंपनियों को कोष उगाही के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सर्वे संचालित करने वाला संगठन टोक्यो शोको रिसर्च के अधिकारी मसाशी सेकी ने कहा कि कंपनियों के दिवालिया होने की सबसे बड़ी वजह बैंकों द्वारा उन्हें ऋण देने में कोताही बरतना है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक क्रियाकलापों के लिए ऋण पाने वाली कंपनियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। 1990 के दशक की वित्तीय मंदी के बाद से एशिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को उबारने में कॉरपोरेट सेक्टर का ही सबसे बड़ा योगदान रहा है लेकिन वही सबसे अधिक खराब स्थिति में है। देश के मंदी की चपेट में जाने के संकेतों के बीच कंपनियों के मुनाफे में लगातार कमी हो रही है। वैश्विक आर्थिक सुस्ती से देश के निर्यात पर भी असर पड़ा है। खासकर रियल एस्टेट और छोटी कंपनियों पर इसकी सबसे अधिक मार पड़ रही है। रिटेल और परिवहन कंपनियां भी इसकी चपेट में आती जा रही है। गौरतलब है कि जो कंपनियां दिवालिया हुई हैं, उनमें से लगभग 60 प्रतिशत कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या पांच या उससे कम है। लेकिन अब मध्यम आकार की कंपनियां भी दिवालिया होने के कगार पर पहुंच रही हैं। जापान के प्रधानमंत्री तारो आसो ने पिछले महीने बिगड़ रही अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 300 अरब डॉलर के एक पैकेज की घोषणा की थी।सरकार का यह पैकेज छोटी कंपनियों को मदद पहुंचाने के लिए था ताकि वे आर्थिक सुस्ती का सामना कर सकें। वैसे भी एक दशक से जापान की अर्थव्यवस्था में सुस्ती छाई हुई है। उसकी विकास दर एक प्रतिशत के ही आसपास रहती आ रही है। लेकिन अब आशंका जताई जा रही है कि आने वाले सालों में अर्थव्यवस्था की विकास दर या तो एक प्रतिशत के ही आसपास रहेगी या फिर नकारात्मक हो जाएगी।
एफपी टोक्यो
पुब्लिशे: November 12

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